बायोडीजल: स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा
National Bio Fuel Policy 2018 के अनुसार 2030 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग और डीजल में 5% बायोडीजल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा गया है।
जैव ईंधन क्या है?
पारंपरिक जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में गैर-जीवाश्म ईंधन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 10 अगस्त को विश्व जैव ईंधन दिवस मनाया जाता है।
जैव ईंधन एक नवीकरणीय ईंधन है जो जैविक स्रोतों से प्राप्त होता है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलता है।
- बायो-एथेनॉल: चीनी युक्त, स्टार्च युक्त तथा सेल्यूलोसिक बायोमास से उत्पादित ईंधन।
- बायो-डीजल: गैर-खाद्य वनस्पति तेल, एसिड तेल, प्रयुक्त खाना पकाने के तेल/वसा और पशु-वसा से उत्पादित ईंधन।
- बायो-सीएनजी: शुद्ध बायो-गैस का संपीडित रूप जिसकी ऊर्जा क्षमता प्राकृतिक गैस के समान होती है।
- बायोडीजल मिश्रण से आयात निर्भरता में कमी, स्वच्छ पर्यावरण और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिलता है।
किसानों की आय
जैव ईंधन मूल्य श्रृंखला किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करती है।
ऊर्जा सुरक्षा
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाकर देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।
UCO का उपयोग
प्रयुक्त खाना पकाने के तेल (Used Cooking Oil) को फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करने से स्वच्छता और स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
Waste to Wealth
कृषि, वन और नगर निकाय के अपशिष्ट से ईंधन उत्पादन और रोजगार सृजन संभव होता है।
बायोडीजल खरीद नीति (मुख्य बिंदु)
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जैव ईंधन मिश्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मौजूदा डीजल के विकल्प के रूप में बायोडीजल का प्रयोग व्यावहारिक है और 5% तक मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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